अगर आप भूतो पर विश्वास करते है ,तो आपने भानगढ़ के किले का नाम जरूर सुना होगा।
एक ऐसा किला भारत में या कहे पूरी दुनिया में सबसे भूतिया जगहों में से एक के रूप में जाना जाता है।
तो क्या है भानगढ़ के किले का रहस्य , क्यों इसे भूतिया, शापित हॉटेंड किला जैसे नाम दिए गए है ,क्यों यहाँ रात में जाना मना है। तो चलिए जानते है भानगढ़ के किले का इतिहास एवं इसके भूतिया होने का सच। भानगढ़ के किले का इतिहास :
बात है करीब 16 शताब्दी की उस वक़्त भानगढ़ एक समृद्ध जगह थी।
भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले स्थित है ,भानगढ़ के किले को आमेर के राजा भगवंत दस ने 1575 में बनवाया था , मुग़ल शासक अकबर के नवरत्नों में शामिल और भगवंत दस के छोटे बेटे और मुग़ल सेनापति मानसिंघ के भाई राजा माधोसिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया।
विक्रम संवत 1722 में इसी वंश के हरी सिंह ने गद्दी संभाली इसके साथ ही इस किले की चमक कम होना शुरू हो गयी
छत्र सिंह के बेटे अजब सिंह ने संमीप ही अजबगढ़ बसाया और वही रहने लगा ,यह समय औरंगजेब के शासन काल का था ,औरंगजेब की शासन पर पकड़ ढीली होने लगी थी ,जयपुर के राजा जयसिंह ने हरिसिंह को मारकर भानगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया और गद्दी माधोसिंह के वंशजो को दे दी।
ये था भानगढ़ के किले का इतिहास ,आइये अब जानते है इस
के भूतिया पीछे की सबसे चर्चित मान्यता।
see more storiesशापित किले का रहस्य
कहते है की भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बेहद सुन्दर थी ,देश के कोने -कोने से राजकुमार उनसे विवाह करना चाहते थे।
एक बार वो अपने किले से सखियों के साथ बाजार के लिए निकली ,वो एक दुकान पर इत्र पसंद कर रही थी ,वही पर सिंधु सेवड़ा नाम का व्यक्ति उन्हें गौर से देख रहा था ,सिंधु सेवड़ा उसी राज्य में रहता था और वो काले जादू में महारथी था।
माना जाता है की वो राजकुमारी के रूप का दीवाना था और उनसे बेहद प्रेम करता था ,इसलिए उसने उस दुकान पर जहा राजकुमारी इत्र पसंद कर रही थी उस इत्र की बोतल पर काला जादू कर दिया और इस तरह राजकुमारी को अपने वश में कर लिया।
लेकिन एक विश्वशनीय व्यक्ति जो उस तांत्रिक के बार्रे में जानता था उसने ये बात राजकुमारी को बता दी ,ये बात जानते ही राजकुमारी ने उस इत्र की बोतल को उठा कर कर पत्थर पर पटक दिया ,पत्थर पर गिरते ही बोतल टूट गयी और सारा इत्र उस पत्थर पर बिखर गया ,इसके साथ ही वो पत्थर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के पीछे चल पड़ा और उसे कुचल दिया जिससे उसकी मौके ओर ही मौत हो गयी , मरने से पहले उसने शाप दिया की इस किले में रहने में वाले लोग जल्दी ही मर जाएंगे और दोबारा जन्म नहीं ले सकेंगे और उनकी आत्मा इस किले में भटकती रहेगी।
उस तांत्रिक की मौत के कुछ दिन बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच युधः हुआ जिसमे उस किले के सारे लोग मारे गए ,यहाँ तक की राजकुमारी रत्नावती भी उस शाप से नहीं बच पायी और उनकी भी उस युद्ध में मौत हो गयी।
कहते है की तभी से मृत लोगो की आत्माएं आज भी इस किले में रहती है।
तो ये थी भानगढ़ के किले के भूतिया होने की पूरी कहानी।
वैसे अगर देखा जाये तो ये सिर्फ एक किवंदती ही है जो बुजुर्गो से सुनी है ,लेकिन
आपको ये बात कितनी सच लगती है , और क्या आप भी मानते है की भानगढ़ का किला सच में भूतिया है या ये सिर्फ एक वहम है ,
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जय हिन्द। |
